माना की उलझनों से भरी है ज़िन्दगी
फिर भी उलझनों से बड़ी है ज़िन्दगी
जो ख्वाब देखे है हकीकत के लिए
उलझनों में न भूल जाइये
जो ख्वाब है खुद के लिए
माना ज़िन्दगी बहुत रुलाती है
कुछ पल के लिए
अपना समझ के भूल जाइये कुछ पल के लिए
ये माना बेवफा है ज़िन्दगी
दगा दे जाएगी एक दिन
इस दगाबाजी के लिए मत रो ज़िन्दगी भर के लिए .
-अभय प्रताप सिंह
फिर भी उलझनों से बड़ी है ज़िन्दगी
जो ख्वाब देखे है हकीकत के लिए
उलझनों में न भूल जाइये
जो ख्वाब है खुद के लिए
माना ज़िन्दगी बहुत रुलाती है
कुछ पल के लिए
अपना समझ के भूल जाइये कुछ पल के लिए
ये माना बेवफा है ज़िन्दगी
दगा दे जाएगी एक दिन
इस दगाबाजी के लिए मत रो ज़िन्दगी भर के लिए .
-अभय प्रताप सिंह
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